ED Seized More Than 19 Kg Of Gold From The Bank Locker Of Cyber Thug Puneet. – ED ने साइबर ठग पुनीत के बैंक लॉकर से 19 किलो से अधिक सोना किया जब्‍त



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ईडी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “आरोपी को उसी दिन दिल्ली पीएमएलए कोर्ट में पेश किया गया और 12 दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया गया. वर्तमान में वह न्यायिक हिरासत में हैं.” यह जब्ती विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर की गई है, जिससे संकेत मिलता है कि पुनीत कुमार ने अपनी मां के नाम पर इंडियन बैंक में रखे लॉकर में सोने के रूप में साइबर अपराध की आय छिपाई है.

इसके अलावा फरवरी और मार्च 2024 में पीएमएलए के प्रावधानों के तहत की गई तलाशी में 14 परिसरों से 8 किलोग्राम वजन वाली सोने की छड़ें सहित कई संपत्तियां जब्त की गईं, जिनकी कीमत 5.04 करोड़ रुपये है. पुनीत कुमार के परिसर से 75 लाख नकद, आभूषण, लक्जरी घड़ियां, मर्सिडीज, ऑडी और किआ जैसी लग्जरी कारों के साथ आपत्तिजनक दस्तावेज और सबूत वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद किए गए.

ये कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग योजना का हिस्सा है जिसमें विदेशी आधारित ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां भारतीय निवासियों का शोषण करती हैं.

ईडी के सूत्रों के अनुसार, 2 मार्च को गिरफ्तार किए गए पुनीत कुमार, आशीष कक्कड़, आनंद निकेतन, चाणक्यपुरी के निवासी केशव सूद और साकेत में रहने वाले शिव दरगर और अन्य देश से बाहर भी इन गतिविधियों में शामिल थे.

ईडी ने आरोप लगाया कि आरोपी संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, हांगकांग, चीन, मलेशिया, मॉरीशस और थाईलैंड सहित दुनिया भर के विभिन्न स्थानों पर हवाला लेनदेन में लगे हुए थे.

विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत पिछले साल 22 और 23 मई को कक्कड़ की संपत्तियों की तलाशी के दौरान ईडी ने विदेशी बैंकों में ऑनलाइन लेनदेन के लिए आधार और पैन कार्ड डिजिटल उपकरणों जैसे जाली/फर्जी आईडी सहित बड़ी संख्या में आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए. साथ ही लैपटॉप, कंप्यूटर हार्ड डिस्क, और पेन ड्राइव भी बरामद किए जिसमें विदेशी रिकॉर्ड शामिल हैं. ईडी को कई भारतीय और विदेशी पंजीकृत फर्मों के टिकट और साथ ही ऐसी कई भारतीय और विदेशी फर्मों के खाली लेटरहेड भी मिले.

ईडी के सूत्रों ने आगे कहा कि कक्कड़ ने भारत और विदेशों में मुख्य रूप से चीन, सिंगापुर, हांगकांग और दुबई में कई शेल ट्रेडिंग फर्म और फर्जी कंपनियों की स्थापना की. इन फर्मों को मनगढ़ंत या जाली दस्तावेजों का उपयोग कर विभिन्न कर्मचारियों या किराए पर लिए गए व्यक्तियों के नाम पर पंजीकृत किया गया था. उनका उपयोग विदेशी पंजीकृत गेमिंग वेबसाइटों द्वारा संचालित ऑनलाइन गेमिंग गतिविधियों से रूटिंग एकत्र करने और अपराध की आय को बाहरी रूप से प्रेषित करने के लिए किया गया था.

यह ध्यान देने योग्य है कि ऑनलाइन गेमिंग से अपराध की आय को भारत से बाहर भेजना फेमा प्रावधानों का उल्लंघन है.

कक्कड़ और उनके सहयोगियों ने कथित तौर पर एक विशिष्ट कार्यप्रणाली तैयार की जिसमें जाली या मनगढ़ंत दस्तावेजों का उपयोग कर डमी फर्मों का निर्माण किया गया. उन्होंने इन फर्मों का उपयोग विशेष आर्थिक क्षेत्रों में आयात निर्यात गतिविधियों और फेमा प्रतिबंधों से बचने के लिए किया. डमी कंपनियों और फर्मों के नाम से खोले गए बैंक खातों के संचालन में भी इन्हीं जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया.

सूत्रों का दावा है कि इस कार्यप्रणाली का उपयोग कर कथित व्यक्तियों ने 167 घरेलू फर्मों की कंपनियों के लिए 188 बैंक खाते और 105 विदेशी फर्मों की कंपनियों के लिए 110 बैंक खाते संचालित किए.

”विदेशी कंपनियों में से 46 चीन में, 30 सिंगापुर में, 18 हांगकांग में, सात संयुक्त अरब अमीरात में, दो मलेशिया में, एक थाईलैंड में और एक मॉरीशस में स्थित थी. आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर प्राप्त करने या नकली हस्ताक्षर करने के बाद डमी फर्मों की खाली चेकबुक अपने पास रख लीं.”

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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